AI युद्ध का तरीका बदल सकता है, लेकिन जीत प्रशिक्षित सैनिक और मजबूत सैन्य शक्ति ही दिलाएगी: राजनाथ सिंह
- By Gaurav --
- Saturday, 11 Jul, 2026
AI May Change Warfare, But Victory
विशाखापत्तनम: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों ने युद्ध की प्रकृति को बदलना शुरू कर दिया है, लेकिन पारंपरिक सैन्य क्षमताओं का महत्व आज भी उतना ही है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में AI की बड़ी भूमिका हो सकती है, लेकिन अंतिम जीत राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मजबूत सैन्य शक्ति से ही सुनिश्चित होगी।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में INS महेंद्रगिरि को शामिल किए जाने के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नई तकनीक और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बिना पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म अधूरे हैं, वहीं मजबूत पारंपरिक क्षमता के बिना केवल तकनीक भी पर्याप्त नहीं है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन देशों ने नई तकनीकों के आकर्षण में अपनी पारंपरिक सैन्य ताकत की उपेक्षा की, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा नीति दोनों क्षेत्रों—आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सैन्य क्षमता—को समान रूप से मजबूत करने पर आधारित है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि INS महेंद्रगिरि इसी सोच और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने पारंपरिक और आधुनिक सैन्य क्षमताओं के प्रभावी समन्वय का सफल प्रदर्शन किया है और आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक जवाब देने की क्षमता भी साबित की है।
उन्होंने कहा कि देश में बनने वाला प्रत्येक युद्धपोत केवल नौसेना की ताकत नहीं बढ़ाता, बल्कि पूरे रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को भी मजबूती देता है। जहाज निर्माण उद्योग स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, प्रोपल्शन सिस्टम, सॉफ्टवेयर, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों को बढ़ावा देता है तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार 'मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030' के तहत भारत को जहाज निर्माण और समुद्री रक्षा नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके लिए मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड, शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम और शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम जैसी कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।